‘एक ईश्वर को मानने वालों के लिए 2 छंद सही…’ वंदे मातरम् को लेकर छिड़ी बहस पर बोलीं शर्मिला टैगोर
मशहूर बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम् पर अपनी राय रखते हुए कहा कि देश के सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करने के लिए राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो छंद ही गाए जाने चाहिए.
देश में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर इन दिनों नई बहस छिड़ गई है. इसी बीच भारतीय सिनेमा की दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने राष्ट्रीय गीत को लेकर अपना नजरिया साझा किया है. एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं को देखते हुए वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंद ही अपनाना सही फैसला है.
धार्मिक मान्यताओं और वंदे मातरम् पर शर्मिला टैगोर ने अपनी बात रखते हुए कहा, “मेरा मानना है कि यहां काफी धर्मों के लोग रहते हैं, मजहब के लोग रहते हैं, जो एक गॉड में विश्वास करते हैं. एक भगवान न की बहुत सारे भगवान और वंदे मातरम् के जो स्टैंजा हैं (छंद) वो वंदना करते हैं कई सारे भगवान को…आप पढ़ेंगे उसको तो आपको पता चलेगा उसमें सभी भगवान का जिक्र है नाम के साथ. तो वो जो एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए मुश्किल है कहना कि ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’. तो इसलिए अगर इंडिया में जितने धर्म के लोग हैं उसको अगर हम इकट्ठा साथ ले चलें, तो पहले दो 2 छंद बहुत अच्छे हैं.”
‘वंदे मातरम्’ पर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने
शर्मिला टैगोर का मानना है कि जो लोग सिर्फ एक ईश्वर में यकीन रखते हैं, उनकी मान्यताओं के हिसाब से ये सहज नहीं हो सकता. ऐसे में सभी को एक सूत्र में पिरोने के लिए गीत के पहले दो छंद पूरी तरह सही हैं. दरअसल, इन दिनों वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं. कांग्रेस का कहना है कि वो सिर्फ दो छंद ही गाएगी. हालांकि, बीजेपी का कहना है कि ऐसा करना, पूरा गीत न गाना, गीत का अपमान है.
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मुकेश खन्ना का बड़ा दावा
हाल ही में एक्टर मुकेश खन्ना ने भी एक बड़ा बयान दिया था. उन्होंने मांग की थी कि मौजूदा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को हटाकर ‘वंदे मातरम्’ को देश का राष्ट्रगान घोषित किया जाना चाहिए. मुकेश खन्ना ने दावा किया था कि ‘जन गण मन’ ब्रिटिश हुकूमत और महारानी एलिजाबेथ के सम्मान में लिखा गया था, इसलिए वो हमारा नहीं है.




